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बिहार में सड़क हादसों को लेकर बड़ा फैसला: 24 घंटे में लौटाना होगा वाहन, घायलों को मिलेगा ₹1.5 लाख तक मुफ्त इलाज

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बिहार पुलिस मुख्यालय ने सड़क दुर्घटना मामलों में बड़ा फैसला लिया है। अब दुर्घटनाग्रस्त वाहन 24 घंटे में लौटाना होगा। साथ ही हादसे में घायलों को ₹1.5 लाख तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी।

पटना/आलम की खबर:बिहार में सड़क दुर्घटनाओं से जुड़े मामलों में आम लोगों को राहत देने के उद्देश्य से पुलिस मुख्यालय ने बड़ा और अहम फैसला लिया है। अब किसी भी सड़क हादसे में जब्त या दुर्घटनाग्रस्त वाहन को 24 घंटे के भीतर उसके मालिक को लौटाना अनिवार्य होगा। यदि थाना स्तर पर तय समय के अंदर वाहन रिलीज नहीं किया जाता है, तो वाहन मालिक सीधे पुलिस मुख्यालय में शिकायत दर्ज करा सकेंगे। इस नई व्यवस्था को बिहार पुलिस द्वारा पारदर्शिता बढ़ाने और लोगों की परेशानियां कम करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।इस संबंध में जानकारी देते हुए Sudhanshu Kumar ने बताया कि सड़क दुर्घटनाओं के बाद वाहन मालिकों को अक्सर थाना स्तर पर अनावश्यक देरी, कागजी प्रक्रिया और दौड़भाग का सामना करना पड़ता था। पुलिस मुख्यालय को लगातार ऐसी शिकायतें मिल रही थीं कि दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को छोड़ने में जरूरत से ज्यादा समय लगाया जा रहा है। इसी समस्या को देखते हुए अब नई मॉनिटरिंग व्यवस्था लागू की गई है।

एडीजी यातायात ने स्पष्ट किया कि राज्य के सभी जिलों के एसपी और यातायात डीएसपी को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए गए हैं। अब हर सड़क दुर्घटना मामले में थाना पुलिस को तय समय के भीतर कार्रवाई पूरी करनी होगी। यदि किसी थाने में वाहन रिलीज करने में अनावश्यक देरी होती है, तो संबंधित अधिकारियों से जवाब-तलब किया जाएगा और कार्रवाई भी संभव है।

पुलिस मुख्यालय की ओर से वाहन मालिकों की शिकायत के लिए मोबाइल और व्हाट्सएप नंबर 9031829356 भी जारी किया गया है। यदि किसी व्यक्ति का वाहन 24 घंटे के भीतर वापस नहीं किया जाता है, तो वह सीधे इस नंबर पर शिकायत कर सकता है। पुलिस मुख्यालय स्तर पर मामले की निगरानी की जाएगी और जरूरत पड़ने पर संबंधित जिले के अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाएगी।

नई व्यवस्था के तहत दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की रिहाई की प्रक्रिया की निगरानी कंट्रोल रूम से भी की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल प्रक्रिया को तेज करना नहीं बल्कि थाना स्तर पर भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव की शिकायतों को भी कम करना है। कई बार वाहन मालिकों को छोटे मामलों में भी कई दिनों तक थाने के चक्कर लगाने पड़ते थे, जिससे उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता था।इस प्रेस वार्ता के दौरान सड़क दुर्घटना में घायलों को राहत देने के लिए केंद्र सरकार की योजना से जुड़ी अहम जानकारी भी साझा की गई। एडीजी सुधांशु कुमार ने बताया कि सड़क हादसे में घायल लोगों को अब डेढ़ लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज उपलब्ध कराया जाएगा। यह सुविधा प्रधानमंत्री राहत योजना के तहत दी जाएगी और इसका लाभ लेने के लिए कुछ जरूरी प्रक्रियाओं का पालन करना होगा।

उन्होंने बताया कि दुर्घटना के बाद पीड़ित को 24 घंटे के भीतर मान्यता प्राप्त अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी होगा। योजना के तहत सात दिनों तक इलाज का खर्च सरकार वहन करेगी। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हादसे के बाद किसी भी घायल व्यक्ति का इलाज पैसे के अभाव में न रुके।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सड़क हादसे की स्थिति में लोग तुरंत डायल-112 पर संपर्क करें। सूचना मिलने के बाद संबंधित थाना पुलिस को ई-डार पोर्टल पर दुर्घटना का विवरण दर्ज करना होगा। इसके अलावा थाना स्तर पर 24 घंटे के भीतर मामले का सत्यापन भी अनिवार्य कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि डिजिटल मॉनिटरिंग और त्वरित सत्यापन से पीड़ितों को जल्दी सहायता मिल सकेगी।

प्रेस वार्ता के दौरान लंबित ई-चालान को लेकर भी सख्त रुख अपनाने की बात कही गई। एडीजी यातायात ने बताया कि राज्य में इस समय ढाई लाख से अधिक ई-चालान लंबित पड़े हुए हैं। इन्हें निपटाने के लिए सभी जिलों में विशेष अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत लोक अदालतों का आयोजन किया जा रहा है, जहां वाहन चालकों को 50 प्रतिशत तक राहत भी मिल सकती है।उन्होंने कहा कि 90 दिनों से अधिक समय से लंबित चालानों को प्राथमिकता के आधार पर निपटाया जाएगा। यह एकमुश्त निपटान योजना वित्तीय वर्ष 2026-27 तक लागू रहेगी। यदि वाहन मालिक समय पर चालान जमा नहीं करते हैं, तो उनके ड्राइविंग लाइसेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन निलंबित करने जैसी कार्रवाई भी की जा सकती है।

ट्रैफिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार पुलिस के ये फैसले सड़क सुरक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण हैं। लंबे समय से सड़क दुर्घटना मामलों में वाहन रिलीज में देरी और मुआवजा प्रक्रिया को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं। ऐसे में नई व्यवस्था आम लोगों को राहत देने में मददगार साबित हो सकती है।

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सड़क हादसों के बाद शुरुआती कुछ घंटे बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। यदि घायल को समय पर इलाज मिल जाए तो कई जिंदगियां बचाई जा सकती हैं। ऐसे में मुफ्त इलाज योजना दुर्घटना पीड़ितों के लिए बड़ी राहत मानी जा रही है।

राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय का कहना है कि इन फैसलों का उद्देश्य केवल नियम लागू करना नहीं बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था को अधिक मानवीय, पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। आने वाले दिनों में सड़क सुरक्षा और दुर्घटना प्रबंधन को लेकर और भी नई पहल देखने को मिल सकती है।

कुल मिलाकर, बिहार में सड़क हादसों से जुड़े मामलों में पुलिस मुख्यालय के इस फैसले को आम लोगों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है। वाहन रिलीज की समय सीमा तय होने, मुफ्त इलाज की सुविधा और ई-चालान निपटान अभियान से लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है।

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